मार्च माह का लोकवाणी कार्यक्रम मातृशक्ति को समर्पित
रायपुर
लोकवाणी की 16वीं कड़ी में मुख्यमंत्री बघेल मातृ शक्ति से माताओं-बहनों और बेटियों के साथ बातचीत करते हुए कहा कि बहुत बड़ी संख्या में माताओं, बहनों और बेटियों ने अपने विचार, अपनी भावनाओं को रिकार्ड किए गए संदेशों के माध्यम से व्यक्त किया। हिन्दी के अलावा छत्तीसगढ़ी, हल्बी भाषाओं में भी बहनों ने अपने विचार रखे। मुख्यमंत्री बघेल ने लोकवाणी में राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के हित में किए जा रहे कार्यों की चर्चा करते हुए कहा कि हम छत्तीसगढ़ की कल्पना ही छत्तीसगढ़ महतारी के रूप में करते हैं। छत्तीसगढ़ को मां के रूप में, मातृशक्ति के रूप में, देखने और समझने का विचार हमें अपने पुरखों से विरासत में मिला है। राज्य गठन के बाद हमें लगता था कि यह भाव और अधिक सम्मान पाएगा, इसे सार्थक बनाया जाएगा। राज्य सरकार ने डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा द्वारा रचित छत्तीसगढ़ी गीत 'अरपा, पइरी के धार, महानदी हे अपार, इंद्रावती ह पखारे तोर पइयां, महूँ पाँव परँव तोर भुइँया, जय हो-जय हो छत्तीसगढ़ मइयाझ् को राज्य गीत घोषित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह हमने महिलाओं के प्रति अपनी सरकार की प्राथमिकता को स्पष्टत: घोषित किया है। हमारे छत्तीसगढ़ में दंतेश्वरी- बम्लेश्वरी-महामाया- चंद्रहासिनी- दुर्गा- शीतला और देवी के हर स्वरूप को पूजा जाता है। इस तरह हमारे जनमानस में मातृशक्ति की आराधना का जो भाव है, उसे हमने नए ढंग से प्रतिष्ठित किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को आदर देने का संस्कार जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है उनके अधिकारों की रक्षा करना, उनकी शिक्षा, सेहत, स्वावलम्बन, आत्मसम्मान के लिए सतत् प्रयास करना। राज्य सरकार ने इस दिशा में ठोस काम किए हैं। लोकवाणी में महिलाओं ने राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के पोषण और सेहत को लेकर संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों पर उत्साहजनक प्रतिक्रिया दी। दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा ब्लॉक के टिकनपाल भठ्टीपारा की हिरमी बाई ने हल्बी भाषा में अपने विचार व्यक्त करते हुए महिला बाल विकास विभाग के संदर्भ मेला में उनके बच्चे का स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद डॉक्टरों ने दवाईयां दी। बच्चे की अस्पताल में 15 दिन देखभाल की गयी। आंगनबाड़ी केंन्द्र में पोषण आहार दिया गया। जिससे बच्चे का वजन बढ़ा और वह स्वस्थ है। उन्होंने इस योजना के संचालन के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। राजनांदगांव जिले की रेणुका सोनी और रितु सिन्हा ने मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। सूरजपुर जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गोशिया बानो ने बताया कि लॉकडाउन की अवधि में रेडी-टू-ईट का वितरण कर हितग्राहियों की पोषण सुरक्षा सुनिश्चित की गई।
बघेल ने लोकवाणी में इन महिलाओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद जब मुझे पता चला कि छत्तीसगढ़ में 37.5 प्रतिशत बच्चे कुपोषण और 47 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं तो मुझे बहुत दु:ख हुआ। कुपोषण और एनीमिया अपने आप में एक गंभीर बीमारी की तरह है और इसके कारण बहुत सी बीमारियां हो जाती हैं। इसलिए हमने मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान शुरू किया ताकि कुपोषण और एनीमिया के खिलाफ एक निर्णायक जंग छेड़ी जा सके। इस लड़ाई में किसी भी तरह से संसाधनों की कमी न आए, इसके लिए एक ओर जहां विभागों को समन्वय से काम करने के निर्देश दिए, वहीं दूसरी ओर डीएमएफ की राशि का उपयोग करने की रणनीति अपनाई। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पोषण आहार को बढ़ावा दिया ताकि लोगों को उनकी रुचि के अनुसार पोषक तत्व मिले। मुझे खुशी है कि एक वर्ष में 1 लाख बच्चे, जिसमें बेटियां अधिक हैं, कुपोषण से मुक्त हुए तथा 20 हजार महिलाओं को एनीमिया से निजात मिली।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं चाहूंगा कि बहनें और बेटियां हमारी योजना के अनुसार पोषक तत्व और दवाई लेते रहें। कोरोना काल में भी यह अभियान जारी रहा, जो इस बात का प्रतीक है कि अब कोई भी ताकत आपको कुपोषण और एनीमिया मुक्ति से रोक नहीं पाएगी। आपके सहयोग से हम छत्तीसगढ़ के प्रत्येक बच्चे और नारी को कुपोषण और एनीमिया से मुक्त कराएंगे। उन्होंने कहा कि आदिवासी अंचलों में, शहरी बस्तियों में महिलाओं तक सरलता से स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लीनिक योजना, मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना, दाई-दीदी मोबाइल क्लीनिक, संजीवनी एक्सप्रेस, 102 महतारी एक्सप्रेस, ग्रामीण चलित चिकित्सा इकाई, हमर अस्पताल योजना, हमर लैब योजना, मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान, मितानिन प्रोत्साहन राशि भुगतान सॉफ्टवेयर आदि उपायों से महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच, उपचार तथा सहायक सेवाओं का काम किया जा रहा है।

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